|

सड़कों पर खूब दौड़ रही बिना फिटनेस की स्कूल बसें‚ सैकड़ों बच्चों की जान से खिलवाड़।

संवाददाता‚ प्रवीन सैनी‚ मेरठः सुबह उठकर जिस मां ने अपने बच्चे के लिए नाश्ता बनाया हो, जिस बाप की उंगली पकड़कर बच्चा स्कूल बस में चढ़ा हो। उस माँ-बाप को सूचना मिले की स्कूल बस का एक्सीडेंट हो गया है‚ तो सोचिए उनके दिल पर क्या बीतेगी। किसका कालेज मुंह को नहीं आ जायेगा। लेकिन मेरठ के स्कूल संचालकों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। वह बिना फिटनेस की गाड़ी से यूं ही काम चलाते रहेंगे‚ और बच्चों को भेड़ बकरी की माफिक गाड़ियों में भरकर विद्यालय पहुंचाया जाएगा। जिले में संचालित निजी विद्यालयों के ज्यादातर वाहन सुरक्षा मानकाें को पूरा नहीं कर रहे हैं। कई वाहनों की हालत ऐसी है कि उनमें बैठना हादसे को दावत देने के बराबर है। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। फिर भी बच्चों के जीवन को लेकर न तो विद्यालयों के प्रबंधतंत्र गंभीर हैं ना ही प्रशासन। बच्चे, जो हमारे देश का भविष्य हैं। इन्ही में छिपे हैं भविष्य के लीडर, साइंटिस्ट, खिलाड़ी और डॉक्टर भी। आखिर इनकी सुरक्षा को लेकर शिक्षा को व्यापार बना देने वाले कॉलेज प्रबंधक कितने चिंतित हैं! मेरठ जिले के वर्तमान हालात इसकी बानगी पेश करते हैं। हाल ही में सरधना क्षेत्र में हुए हादसे के बाद जिले में इसकी चर्चा शुरू होना लाजमी है। ताजा हादसे में डेढ़ दर्जन बच्चे घायल हुए तो इससे पूर्व भी इसी तरह के हादसे में दर्जनभर बच्चे घायल हो चुके हैं। इससे पहले डेढ़ वर्ष पूर्व झिटकरी गांव के पास हुए हादसे में 2 दर्जन से ज्यादा स्कूली बच्चे घायल हुए थे। जिलेभर में हादसों की बात करें तो आयेदिन कहीं न कहीं स्कूल बस हादसे का शिकार हो जाती है। अधिकतर मामलों में हादसे की वजह बसों में आई तकनीकी दिक्कत देखी गयी है। आखिर क्यों स्कूली बसों की फिटनेस समय पर नहीं होती अविभावकों के मन में यह बड़ा सवाल है। जिले में दर्जनभर से ज्यादा स्कूल तो ऐसे हैं जिनकी बसों को आरटीओ से परमिट ही नहीं है। बावजूद इसके स्कूल बस के नाम पर वह सड़कों पर फर्राटा भर रहीं हैं। बच्चों की जिंदगी के साथ जितनी लापरवाही स्कूल प्रबंधक बरत रहें हैं उतना ही सहयोग संबंधित विभाग भी उनका कर रहा है। कहीं ऊंचे रसूख के सामने अधिकारियों की बोलती बंद हो जाती है तो कहीं निजी फायदे के लिए अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से आंखे मूंद ली जाती हैं। दावे के साथ कहा जा सकता है कि संबंधित विभाग अगर सख्ती करें तो स्कूली बसों के नाम पर दौड़ रही 50 फीसदी गाड़ियां फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर सकेंगी। सूबे के मुखिया ने शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में काफी काम किया है। अब जरूरत है शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षा के स्तर को सुधारने की। निजी फायदे के लिए सरकारी तंत्र पर पड़ी धूल को साफ करने की। अगर समय पर नहीं की गई तो हादसों की सूरत ओर बड़ी और भयावह हो सकती है।

Posted by रवि चौहान on 3:01 pm. Filed under , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

0 टिप्पणियाँ for "सड़कों पर खूब दौड़ रही बिना फिटनेस की स्कूल बसें‚ सैकड़ों बच्चों की जान से खिलवाड़।"

Leave a reply

सर्वाधिक पढ़ी गयी

Recently Added

Recently Commented