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दरवेश यादव हत्याकांडः पांच गोलियां, तीन निशाने, एक जिंदगी खत्म

मंडल ब्यूरो, उदयवीर सिंह, आगरा: समय : दोपहर 2:45 बजे  स्थान : अधिवक्ता अरविंद मिश्रा का चेंबर धांय.... धांय.... धांय.... धांय... धांय। एक मिनट से कम समय के भीतर पांच गोलियां चलीं। पहले एक, फिर एक साथ तीन, फिर एक। ये गोलियां चलाईं मनीष ने। निशाने पर तीन लोग थे। दरवेश यादव, उनका रिश्तेदार मनोज और मनीष खुद। फायरिंग थमने के बाद मनोज डर के मारे जमीन पर बैठा हुआ था बुरी तरह सहमा हुआ मानो मौत उसके सामने हो, जबकि दरवेश और मनीष गोली लगने से खून से लथपथ जमीन पर पड़े थे। मौके पर 10-15 लोग थे। सभी सन्न थे, सहमे हुए थे। किसी तरह खुद को संभालकर दरवेश और मनीष को अस्पताल पहुंचाया। दरवेश की जान नहीं बच सकी। मनीष कोमा में है। सब कुछ इतना अचानक हुआ कि हर कोई अवाक रह गया। मनीष के इरादे खतरनाक है, यह सबको मालूम था, लेकिन इतने खतरनाक है, इसका अंदाजा किसी को भी नहीं था। वह गुस्से से भरा घूम रहा था, गुमसुम था, लेकिन उसका चेहरा सामान्य लग रहा था। बुधवार को दरवेश का स्वागत समारोह था। तमाम अधिवक्ता ही नहीं, न्यायिक अधिकारी भी उनका स्वागत कर रहे थे। लेकिन, मनीष शर्मा नहीं पहुंचा था। कुछ अधिवक्ताओं ने उससे फोन पर कहा कि गिले शिकवे अपनी जगह हैं, कुछ तुम्हारी शिकायतें हैं, कुछ दरवेश की हैं, आ जाओ, मिल बैठकर बात करेंगे, तनाव दूर हो जाएगा। मनीष मान गया, थोड़ी देर में आ भी गया तो सभी को लगा कि गुस्सा थूककर आया है, किसे मालूम था कि वह ईर्ष्या की आग में जल रहा है। वह पिस्टल में गोलियां डालकर लाया था। कुछ लोगों ने हत्याकांड से कुछ ही देर पहले उसे पिस्टल को चेक करते हुए देखा था। चश्मदीदों ने बताया कि अधिवक्ता अरविंद मिश्रा के चैंबर में टेबल के एक तरफ दरवेश थीं, दूसरी ओर मनीष था। दरवेश के पास ही मनोज और अन्य रिश्तेदार खड़े थे। मनीष के पास कुछ वकील खड़े थे। मनीष गुस्से में तेज बोल रहा था। दरवेश के भाई सनी यादव ने तहरीर में कुछ यही घटनाक्रम बताया है। पुलिस को मौके से चार खोखे बरामद हुए हैं।लोगों ने बताया कि दरवेश मनीष को समझा रहीं थी। दरवेश के रिश्तेदार भी कह रहे थे कि मनीष तुम्हारा व्यवहार ठीक नहीं है, लेकिन मनीष कुछ मान नहीं रहा था, अपनी कह रहा था, कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं था। तभी दरवेश से मनीष ने कुछ कहा। मनीष ने ठीक से जवाब नहीं दिया, तभी दरवेश का रिश्तेदार मनोज बीच में बोल पड़ा।  उसका बोलना था कि मनीष आपा खो बैठा। चश्मदीदों की मानें तो उसने कहा कि तुझे आज नहीं छोड़ूंगा। यह कहते ही मनीष ने अंटी से निकाल ली। लोग समझे कि डरा रहा है, लेकिन उसने पिस्टल मनोज पर तान दी। अगले ही पल गोली भी चला दी। पिस्टल के खुद पर तनते ही मनोज नीचे झुक गया था। इस कारण गोली उसे नहीं लगी। मनोज पर गोली चलते ही दरवेश मनीष पर चिल्लाईं, तेरा दिमाग खराब हो गया। मनीष के सिर अब खून सवार था। लोगों ने बताया कि वह रुका ही नहीं। मनोज से निशाना हटाया और पिस्टल को दरवेश की तरफ मोड़ दिया।  कोई अपनी जगह से हिल भी नहीं पाया, मनीष ने दरवेश पर एक के बाद एक तीन गोलियां चला दीं। एक उनके सिर में लगी। दो सीने पर लगीं। वह लहुलुहान होकर गिर पड़ीं। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने कहा कि उनकी जान जा चुकी है। दरवेश को तीन गोली लगते ही मनीष समझ गया होगा कि वह बचने वाली नहीं है। वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले मनीष ने एक गोली अपनी कनपटी पर मार ली। यह कनपटी को पार करके सिर के दूसरी ओर निकल गई है। उसकी हालत बेहद गंभीर है। आगरा से दिल्ली रेफर किया गया है। उसके परिवार में कोहराम मचा है।

Posted by रवि चौहान on 1:52 pm. Filed under , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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