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मथुरा-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा, जहां करोड़ों रुपये किए खर्च, वहीं सबसे मैली है यमुना।

मंडल ब्यूरो‚ उदयवीर सिंह‚ आगराः उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2018 में यमुना नदी के प्रदूषण की जो रिपोर्ट जारी की है, उसने जल निगम और यमुना एक्शन प्लान पर सवालिया निशान उठा दिए हैं। दरअसल, आगरा में ताजमहल और मथुरा में वृंदावन, गोकुल के धार्मिक मान्यता के कारण सबसे ज्यादा खर्च यमुना सफाई पर किया गया है, लेकिन यहीं दोनों जगह यमुना नदी पूरे प्रदेश में सबसे गंदी और नाले से भी बदतर हालात में है। यमुना नदी की सफाई के नाम पर यमुना एक्शन प्लान में 1500 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और 1174 करोड़ रुपये की योजना फिर से बनाई गई है। नमामि गंगे योजना के तहत 460 करोड़ रुपये यमुना सफाई के लिए दिए गए हैं। वहीं 11 करोड़ रुपये हाल में ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन के लिए मिले हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सालाना रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यमुना में शहर के अंदर ही 61 नालों के जरिए सीवर गिर रहा है। यही वजह है कि कैलाश घाट से ताजमहल के बीच यमुना नदी पांच गुना प्रदूषित है। मथुरा और आगरा में भारी प्रदूषण के कारण यमुना नाले में तब्दील हो चुकी है, लेकिन इटावा से आगे जब सिन्डौस में पचनदा में चंबल, क्वारी, सिंद, पहूज नदी यमुना में मिलती है तब जाकर यमुना नदी नाले से नदी में तब्दील होती है।

Posted by रवि चौहान on 1:55 pm. Filed under , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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