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अब जागे हैं नीन्द के बाद......??

ज़हर से मौत के बाद ज़हर पर कार्रवाई में जुटा प्रशासन

थाना भोपा पुलिस ने 20 लीटर रेक्टिफाईड़ शराब के साथ दो व्यक्तियों को भेजा जेल

आबकारी निरीक्षक बुढाना आलोक सिंह, नायब तहसीलदार जानसठ इन्द्रदेव शर्मा,थाना प्रभारी ककरौली जितेन्द्र अम्बावत ने संयुक्त रूप से गंगा खादर क्षेत्र के विभिन्न गाँवो में चलाया छापामारी अभियान

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किसी भी बड़ी घटना के बाद घड़ियाली आसूँ बहाना पुरानी आदतों में शामिल हो चला है जड़ों को सिंचित कर शाखों को काटना जैसे कार्रवाई की परम्परा हो गयी है ज़हरीली शराब पीने से हुई दो राज्यों के सीमावर्ती जनपदों में 60 से अधिक मौत के बाद जागे प्रशासन में हड़कम्प मच गया है तहसील अधिकारी, आबकारी विभाग,पुलिस विभाग अवैध शराब के अड्डों को तलाशने में जुट गये हैं मुज़फ्फरनगर में  भोपा,पुरकाजी,ककरौली थाना क्षेत्रों में स्थित गंगा खादर क्षेत्र में कच्ची शराब का गढ़ माना जाता है जहाँ देसी तरीकों से कच्ची शराब बनाकर सस्ते दामों पर गाँव की आबादी में सप्लाई की जाती है

पुराने सड़ चुके गुड़ को मिट्टी के गड्ढों में पॉलिथीन के ऊपर डालकर सड़ने के लिये छोड़ दिया जाता है इसके उपरांत ईस्ट (ख़मीर )आदि डालकर ऑयल के खाली ड्रम में भरकर लेते हुवे ड्रम के नीचे आग लगाई जाती है ड्रम के एक कटे हुवे भाग पर छेद वाले ढक्कन पर पतले पाइप के सहारे पैदा हुई वाष्प को किसी पात्र में इकट्ठा कर लिया जाता है फिर इस तैयार कच्ची शराब की तीव्रता को बढ़ाने के लिये सस्ते ज़हरीले केमिकल का सहारा लिया जाता है।केमिकल युक्त मिश्रित शराब ग्रामीणों को सस्ते दामों पर बेंची जाती है

लाइसेंस की शराब जहाँ सरकार को बड़ा रेवेन्यू उपलब्ध कराती है वहीं कच्ची शराब भी अक्सर जेबें भारी करती रही है तत्कालीन एसएसपी अनन्त देव तिवारी के प्रयासों ने क्षेत्र में कच्ची शराब का धंधा धड़ाम करने की शुरुआत की थी जिसे वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार ने बखूबी आगे बढ़ाया है किन्तु हरियाणा ब्राण्ड शराब ने अब क्षेत्र में पैर पसारने शुरू कर दिये हैं

प्राप्त आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश सरकार को लाइसेंस की शराब से 30 हज़ार करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त होता है वहीं सरकार आबकारी विभाग पर रेवेन्यू का केवल 0.60 %ही खर्च करती है स्टाफ की कमी सुविधाओं का अभाव बदनाम और बीमार से दिखने वाले इस अमीर विभाग की लाचारी का अंदाज़ा उपरोक्त आँकड़ो से लगा लेना काफी नहीं कानूनी दाँव पेंच के कारण अधिकारियों द्वारा की गयी कार्रवाई कई बार दो धारी तलवार भी सिद्ध हुई है।

पूर्व में जहाँ बड़ी आयु वर्ग के व्यक्ति शराब का सेवन करते थे आज युवा पीढी के कदम तेज़ी से इस बढ़े हैं जो बेहद चिन्ता का विषय है पंजाब राज्य के बाद अपने प्रदेश में बढ़ रही इस तबाही को रोकने के लिये नई योजनाओं पर विचार करना होगा तथा युवा पीढी को इस गर्त से बचाने को लेकर अब सरकार को ज़रूरी उपाय करने ही होंगे

Posted by रवि चौहान on 4:28 pm. Filed under , , , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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