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घरों व विद्यालयों से लेकर गंगा तट तक दिखा बसन्त पर्व का महत्व


बिलग्राम (हरदोई) हिंदू धर्म में विद्या की देवी माँ सरस्वती के पूजन को लेकर जो धार्मिक मान्यता के अनुसार इस  पर्व का महत्व
वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नई उमंग से सूर्योदय होता है और नई चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है।
कहा जाए तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला होता है, पर वसंत पंचमी (माघ शुक्ल की पंचमी तिथि) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व।इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के आधार पर लोगों ने इस पर्व विशेष पर अपने घरों में माँ सरस्वती के पूजन अर्चन के साथ ही माघ मास में पतित पावनी मां गंगा नदी में स्नान के लिए स्थानीय राजघाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर दान दक्षिणा करने में पुण्य लाभ के लिये देर शाम तक प्रयासरत दिखे।जबकि अधिकांश स्कूल /कालेजों में पारंपरिक विधि विधान से पूजन अर्चन किया गया।नगर स्थित सीताराम सरस्वती शिशु मंदिर ,बीजीआर इंटर कॉलेज में इस पर्व विशेष के साथ ही उक्त विद्यालयों की नींव रखने का भी विशेष महत्व के तौर पर पूजन अर्चन किया गया।जहां पर हवन पूजन इत्यादि कार्यों के साथ अध्यापकों के साथ साथ विद्यार्थियों ने मां सरस्वती को नमन करते हुए आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की।

Posted by रवि चौहान on 4:22 pm. Filed under , , , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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