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देहरादून में भी हुई छट पूजा कीशुरुवात


एक ऐसा पर्व जिसमें जिस ईश्वर की अराधना की जाती है वो साक्षात भक्त के सामने होते हैं। इस व्रत को सबसे कठिन व्रत माना जाता है। चार दिन चलने वाले इस व्रत को महाव्रत आर महापर्व कहा जाता है
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। यह व्रत किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है। इस व्रत का चार दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। प्रत्येक दिन का अपना अलग ही महत्व है। किसी भी पूजा से पहले नहाना सबसे अहम होता है। नहाधोकर ही पूजा की तैयारियां शुरू की जाती हैं। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तरप्रदेश में मनाया जाने वाले छठ महापर्व की शुरूआत भी नहाय खाय से होती है। यानि पहले स्नान कर शुद्ध होने के बाद व्रत शुरू किया जाता है।
सभा का कार्यक्रम आज
देहरादून के टपकेश्वर मंदिर के प्रांगण में नहाय खाय कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत टपकेश्वर मंदिर में साफ सफाई से किया गया। महासभा के सचिव ने बताया कि बिहारी महासभा के बैनर तले सात स्थानों पर छठ का कार्यक्रम कराया जा रहा है। मुख्यरूप से टपकेश्वर, प्रेमनगर, चंद्रबणी, रायपुर मालदेवता नहर, रिस्पना, दीपनगर आदि प्रमुख स्थानों पर बिहारी महासभा के बैनर तले यह कार्यक्रम रखा गया है। सभा द्वारा प्रत्येक केन्द्र की जिम्मेदारी लोगों को दिया गया है। वहां बिजली, पानी, चिकित्सा आदि के लिये अलग अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई है। टपकेश्वर मंदिर में यह जिम्मेदारी ललन सिंह और रीतेश कुमार के साथ सुरेन्द्र अग्रवाल को दी गई है। चंद्रमणी में विनय यादव, गणेश साहनी, सुरेश ठाकुर और बलराम सिंह स्थानीय लोगों के साथ व्यवस्था देखेंगे। प्रेमनगर में शंकर दास, विनय पाल, मनोज साहनी, व्यवस्था देखेंगे। मालदेवता में शंभु सिंह, राजकुमार आदि लोगों को प्रमुखता से लगाया गया है।
सुलभ ने की सफाई
देहरादून स्थित सुलभ इंटरनेशनल ने बिहारी महासभा की सफाई योजना में हिस्सा लिया। सुलभ इंटरनेशनल के एक दर्जन से अधिक लोगों ने सुबह 8 बजे से ही सफाई कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सुलभ इंटरनेशनल के उत्तराखंड प्रभारी सतीश चन्द्र पटेल ने घाट के साफ सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभा से जुडे स्थानीय लोग।
बिहार उत्तरप्रदेश के इस महापर्व का असर उत्तराखंड में भी दिखने लगा है। राज्य के स्थानीय लोग ना सिर्फ सभा से जुड रहे हैं बल्कि योगदान भी कर रहे हैं। कुछ परिवार तो छठ पूजा भी कर रहे हैं। इससे इस महापर्व की आस्था लोगों के बीच में बढ़ रही है। सभा के इस बैठक में सभा के अध्यक्ष सतेन्द्र सिंह, सचिव चंदन कुमार झा, कोषाध्यक्ष रितेश कुमार, संयोजक ललन सिंह, सुरेन्द्र अग्रवाल, विनय कुमार, गणेश साहनी, डॉक्टर रंजन कुमार, डी के िंसंह, डा0 राम विनय, अमरेन्द्र कुमार, आलोक सिंन्हा, रघु, धर्मेन्द्र कुमार, सुनील झा, अशोक कुमार, एस के सिन्हा, विद्याभुषण सिंह समेत सैकड़ों सदस्य मौजूद थे।
लोक आस्था का चार दिनी महापर्व शुरू हो गया है। व्रती सुबह स्नान करने के बाद चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी ग्रहण किये। खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास के बाद शाम को पूजा-अर्चना के बाद खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। 24 घंटे उपवास के बाद शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद यह महापर्व समाप्त हो जाएगा। उधर छठ को लेकर तालाबों, डैमों को सजाने-संवारने का काम अंतिम चरण में है। छठ घाटों को सजाया भी जा रहा है। कई संगठनों की ओर से सफाई की जा रही है। छठ घाटों पर व्रतियों की सुविधाओं का भी ख्याल रखा जा रहा है। पुलिस प्रशासन के साथ पूरा महकमा व्रतियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इस प्रयास में जुट गया है।
पहला प्रसाद है चावल, दाल और कद्दू की सब्जी
गोधन के बाद से ही छठ की तैयारी में हर कोई जुट गया है। घर-घर छठ के सुगवा के मारबो धनुष से ... कोपी कोपी बोलेली छठी मइया...,. कांचे ही बांस के बहंगिया..के गीत बज रहे हैं। जिनके घरों में छठ हो रहा है, वहां परिवार के सभी लोग व्यस्त तो हैं ही, जिनके घर में नहीं हो रहा है वह भी अपना सहयोग कर रहे हैं। कोई सफाई काम में साथ दे रहा है, तो कोई खरीदारी में। मंगलवार को व्रती स्नान पूजा के बाद चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी ग्रहण करेंगे। इसके बाद घर के सदस्य और आम लोग भी इसे ग्रहण करेंगे। इसे छठ का पहला महाप्रसाद भी माना जाता है। लोग घर- घर जाकर प्रसाद भी ग्रहण करेंगे।
मिलों की साफ-सफाई
छठ का गेहूं पीसने के लिए मिल संचालकों ने सफाई करना शुरू कर दिया है। बुधवार और गुरुवार को इन मिलों में सिर्फ छठ का गेहूं ही पिसा जाएगा। मिल संचालक ने बताया कि हमलोग साफ-सफाई करने के बाद छठ पूजा तक कोई दूसरा गेहूं नहीं पीसते हैं। यहां सफाई और पवित्रता का पूरा ख्याल भी रखा जाता है। कई मिलों में गेहूं पीसने का पैसा भी नहीं लिया जाता।
कद्दू की खूब हुई बिक्री
बाजारों में कद्दू खूब गिरे, लेकिन भाव भी ज्यादा रहे। 35 से 40 रुपये प्रति किलो कद्दू बिका। कद्दू के साथ अन्य सामग्री की खरीदारी भी व्रतियों ने की। खासकर नारियल, सूप और पूजन सामग्री की खरीदारी की गई। दूध की एडवांस बुकिंगबुधवार को खरना है। इस दिन दूध की खपत ज्यादा होगी। समय पर दूध उपलब्ध हो जाए, इसके लिए दूध की एडवांस बुकिंग भी की जा रही है। दूध के काउंटरों पर पहले ही पैसे जमा कर दिए गए हैं। गौशाला में भी व्रतियों ने दूध की जरूरत बढ़ा दी है। गौशाला संचालकों के अनुसार जिनके घरों में छठ नहीं हो रहा है, दूध नहीं देंगे या कटौती करेंगे। हर हाल में व्रतियों की दूध की जरूरत परा करेंगे।
कई घरों में मिट्टी का चूल्हा भी बनाया गया
कई व्रतियों ने घरों में मिट्टी का चूल्हा भी बनाया है। छठ पूजा के प्रसाद इसी चूल्हे पर बनाए जाएंगे। लोहे के चूल्हे की भी खरीदारी हुई। जबकि कई लोग नई ईंट का उपयोग कर चूल्हा बनाएंगे। मिट्टी के चूल्हे 250- 300 रुपये तक में बिक रहे हैं। खरना के दिन व्रतधारी दिनभर उपवास रखेंगे। सूर्यास्त के बाद भगवान की पूजा- अर्चना होगी। नैवेद्य अर्पित किया जाएगा। इसमें रोटी, खीर केला अर्पित करने की परंपरा है। कई स्थानों पर चावल, दाल और सब्जी भी बनाई जाती है और उसे भगवान को अर्पित किया जाता है।

Posted by रवि चौहान on 7:04 pm. Filed under , , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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