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BSA कार्यालय में कैद किताबें, दो माह से बिना किताबों के पढ़ रहे हैं बच्चे।

संवाददाता‚ अजय पाल सिंह‚ मेरठ। शिक्षा का सत्र शुरू हुए ढाई माह से अधिक हो चुका है। लेकिन बच्चे अभी भी बिना किताबों के पढ़ रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि किताबें न हों। वह बीएसए की कैद में हैं। इसकी पोल तब खुली जब शनिवार को सीडीओ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में छापामार कार्रवाई की। किताबें स्कूलों को समय से मुहैया न कराने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कुमार को सीडीओ ने कड़ी चेतावनी दी। साथ ही पटल सहायक भारत के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि करते हुए उन्हें पटल से हटाकर किसी अन्य को किताबों की जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया। स्कूली बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिलने की शिकायत पर शनिवार को सीडीओ आर्यका अखौरी ने बीएसए कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पटल सहायक से कार्यालय में रखी गई किताबों का ब्योरा मांगा। उनके पास किताबों के प्राप्त होने की तिथिवार विवरण उपलब्ध नहीं था। जो जानकारी थी वह लूज प्रपत्रों पर उपलब्ध थी। रजिस्टर भी अधूरा मिला। वरिष्ठ सहायक भारत की लापरवाही के लिए सीडीओ ने बीएस से प्रतिकूल प्रविष्टि देने के साथ ही पटल से हटाने का निर्देश दिया है। 50 फीसद बच्चों तक नहीं पहुंची किताबें छापामार कार्रवाई में बीएसए कार्यालय में 30 हजार से अधिक किताबें मिली। इनमें मेरठ नगर के लिए 10,658, मेरठ विकास खंड के लिए 2,817, हस्तिनापुर ब्लॉक की 7,027 और जिला विद्यालय निरीक्षक के लिए 9,508 किताबें थीं। अकेले परिषदीय विद्यालयों में अब तक 1,19,260 बच्चों के दाखिले हो चुके हैं, जबकि 50 फीसद बच्चों तक भी पूरी किताबें नहीं पहुंची हैं। यही हाल माध्यमिक स्कूलों में कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों का है। सीडीओ की फटकार के बाद किताबें शनिवार शाम को ही संबंधित स्थानों पर भेज दी गई। उन्होंने तत्काल प्रभाव से किताबों को भेजने के निर्देश दिए थे जिससे सोमवार को स्कूलों तक किताबें पहुंच जाएं। इस साल किताबों के साथ बच्चों को बैग, स्वेटर, जूते, मोजे आदि मुहैया कराए जा रहे हैं। इनका कहना है कि वितरण के लिए आई किताबें स्कूलों की बजाय बीएसए कार्यालय में मिलीं। इस लापरवाही पर बीएसए को चेतावनी दी गई है। उन्हें मंगलवार तक शत-प्रतिशत पुस्तकों का वितरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किताबों का ब्यौरा सही न रखने पर सहायक को प्रतिकूल प्रविष्टि के निर्देश दिए गए हैं।
संवाददाता‚ अजय पाल सिंह‚ मेरठ। शिक्षा का सत्र शुरू हुए ढाई माह से अधिक हो चुका है। लेकिन बच्चे अभी भी बिना किताबों के पढ़ रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि किताबें न हों। वह बीएसए की कैद में हैं। इसकी पोल तब खुली जब शनिवार को सीडीओ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में छापामार कार्रवाई की। किताबें स्कूलों को समय से मुहैया न कराने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कुमार को सीडीओ ने कड़ी चेतावनी दी। साथ ही पटल सहायक भारत के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि करते हुए उन्हें पटल से हटाकर किसी अन्य को किताबों की जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया। स्कूली बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिलने की शिकायत पर शनिवार को सीडीओ आर्यका अखौरी ने बीएसए कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पटल सहायक से कार्यालय में रखी गई किताबों का ब्योरा मांगा। उनके पास किताबों के प्राप्त होने की तिथिवार विवरण उपलब्ध नहीं था। जो जानकारी थी वह लूज प्रपत्रों पर उपलब्ध थी। रजिस्टर भी अधूरा मिला। वरिष्ठ सहायक भारत की लापरवाही के लिए सीडीओ ने बीएस से प्रतिकूल प्रविष्टि देने के साथ ही पटल से हटाने का निर्देश दिया है। 50 फीसद बच्चों तक नहीं पहुंची किताबें छापामार कार्रवाई में बीएसए कार्यालय में 30 हजार से अधिक किताबें मिली। इनमें मेरठ नगर के लिए 10,658, मेरठ विकास खंड के लिए 2,817, हस्तिनापुर ब्लॉक की 7,027 और जिला विद्यालय निरीक्षक के लिए 9,508 किताबें थीं। अकेले परिषदीय विद्यालयों में अब तक 1,19,260 बच्चों के दाखिले हो चुके हैं, जबकि 50 फीसद बच्चों तक भी पूरी किताबें नहीं पहुंची हैं। यही हाल माध्यमिक स्कूलों में कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों का है। सीडीओ की फटकार के बाद किताबें शनिवार शाम को ही संबंधित स्थानों पर भेज दी गई। उन्होंने तत्काल प्रभाव से किताबों को भेजने के निर्देश दिए थे जिससे सोमवार को स्कूलों तक किताबें पहुंच जाएं। इस साल किताबों के साथ बच्चों को बैग, स्वेटर, जूते, मोजे आदि मुहैया कराए जा रहे हैं। इनका कहना है कि वितरण के लिए आई किताबें स्कूलों की बजाय बीएसए कार्यालय में मिलीं। इस लापरवाही पर बीएसए को चेतावनी दी गई है। उन्हें मंगलवार तक शत-प्रतिशत पुस्तकों का वितरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किताबों का ब्यौरा सही न रखने पर सहायक को प्रतिकूल प्रविष्टि के निर्देश दिए गए हैं।
बीएसए ने कहा-किताबें उपलब्ध होने के बाद इसका सत्यापन कमेटी करती है। सत्यापन के बाद किताबें ब्लॉक पर बीआरसी को भेजी जाती हैं। वहां से विद्यालयों को मिलती हैं। सत्यापन प्रक्रिया में विलंब होने के कारण यह देरी हुई। अब किताबें भेज दी गई हैं।

Posted by रवि चौहान on 5:19 pm. Filed under , , , , , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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