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खनन माफिया का रेत का किला हुआ धराशाई, बेटा सलाखों के पीछे।

संवाददाता‚ नबी चौधरी‚ सहारनपुर। किसी दौर में अवैध खनन की दुनिया का बेताज बादशाह या यूं कहें कि आर्थिक आतंकवादी हाजी इकबाल ऊरफ बालला आज अपने ही बुने सियासी मकड़जाल में फस कर रह गया है।  कल तक दलितों के सहारे सियासी बिसात पर गोटियां चलने वाला धुरन्धर आज दलितों की ही जमीनों को अपना निवाला बनाने के आरोप में कानून के शिकंजे में फंसने से बचने की खातिर पुलिस से भागा भागा फिर रहा है। जहां पुलिस ने उसके साहबजादे जावेद इकबाल को गिरफ्तार कर पिछले दिनों जेल भेज दिया है। वहीं इकबाल सहित दूसरा बेटा और मौजूदा एमएलसी महमूद अली की गिरफ्तारी के लिए भी इनके तमाम संभावित ठिकानों पर पुलिस लगातार दबिशे दे रही है। पुलिस प्रशासन के पास सबूतों का पुलिंदा इतना मजबूत है कि धरती का सीना चीरकर कमाई गई अकूत दौलत के बल पर पैदा किया गया। उसका सियासी आभामंडल भी शायद इस बार हाजी इकबाल ऊरफ बालला को नहीं बचा पाएगा। इसे भाग्य की विडम्बना कहिये या फिर कुदरत का इंसाफ। कि बड़े-बड़े नेता और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों को अपनी हराम तरीक़े से कमाई दौलत की ताकत पर रकस कराया करता था‚ और जिसके आभामंडल की चमक को देखते हुए खाकी वर्दी हर वक्त सजदे में उसके आगे पड़ी रहा करती थी‚ इस हाजी इकबाल ऊरफ बालला के एक इशारे पर बेगुनाहों को भी गुनाहगार बनाकर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया करती थी। तथा सत्ता कोई भी रही हो पर खनन माफिया का इकबाल अपना जलवा कायम रखता था। आज वहीं शख्स असलियत खुलने पर अपराधी बना अपने ही छुपने की जगह तलाश कर रहा है। वो सियासी सूरमा जो कभी उसका सानिध्य पाने के लिए उसके आगे लाइन में लगे रहा करते थे। आज उसी बालला से निगाहें बचाते फिर रहे है। बालला ने भी खुद कभी सोचा भी नहीं होगा। कि अवैध संसाधनों तथा अपने दिमाग की शातिर तिकड़बाजी से खड़ा किया गया। उसका इतना बड़ा आभा मंडल इतनी जल्दी उसके चेहरे से ईमानदारी‚ शराफत और दानवीर होने का झूठा नकाब उतार कर पूरी दुनिया के सामने उसकी करतूतों की असलियत खोल कर रख देगा। यूं तो बालला की कहानी एक बहुत गरीब और छोटे परिवार से शाही परिवार तक पहुंचने की रोमांचक गाथा है। लेकिन जिस दलित राजनीति के सहारे शातिर  सियासी चाले चलते हुए उसने बड़े बड़े अधिकारियों नेताओं तथा पत्रकारों को भी अपनी चौखट पर सिर झुकाने को मजबूर किया। उसी के द्वारा दलितों का किया जा रहा उत्पीड़न और शोषण उसके पतन का कारण बना और सबूतों का पुलिंदा तथा पुलिसया तफ्तीश का रूख यह बता रहा है। कि खनन माफिया द्वारा जिन दलितों की जमीनों को अपना निवाला बनाया गया वह अब कंई अन्य नेताओं और अधिकारियों तथा  चुनिंदा मीडिया कर्मियों की गर्दनों को भी अपने लपेटे में ले सकता है। कभी खनन माफियाओं को विधानसभा चुनाव में हरवाकर नरेश सैनी को मुस्लिम वोट दिलवाते हुए विधायक बनाने वाले पूर्व कांग्रेसी विधायक अचानक क्यों खनन माफिया के समर्थन में हृदय परिवर्तन कर कूद गये। छोटी-छोटी बातों पर अपनी पार्टी के विधायकों, सांसदों तथा पदाधिकारियों को पार्टी से निष्कासित कर बाहर का रास्ता दिखाने वाली बहन जी दलितों की ही जमीनों को अपना निवाला बनाने वाले खनन माफिया पर कार्रवाई को लेकर आखिर खामोश क्यों है।

Posted by रवि चौहान on 5:31 pm. Filed under , , , , , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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