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वो सेना में गया था बाहरी दुश्मनों से लोहा लेने, अपनों से ही मात खानी पड़ी

वो सेना में गया तो था बाहरी दुश्मनों से लोहा लेने, लेकिन उसे कहां पता था एक दिन उसे अपनों से ही मात खानी पड़ेगी. हम बात कर रहे हैं गोहाना के लाठ गांव के रहने वाले लांस नायक अनिल कुमार की जिन्होंने फर्ज और इंसानियत की राह में खुद की जान गवां दी.ये पूरा मामला 21 मार्च का है. जब लान्स नायक अनिल कुमार अपने परिवार के साथ बरेली में रहते थे. वहां पड़ोस में रहने वाले एक जवान की पत्नी के साथ कुछ असामाजिक तत्व छेड़छाड़ कर रहा था जिसका अनिल कुमार ने विरोध किया. इस पर बदमाशों ने उन पर गोलियां चला कर उनकी हत्या कर दी.23 मार्च को पूरे राजकीय सम्मान के उन्हें अंतिम विदाई दी गई थी. वहीं गोहाना में उनके घर पर मातम पसरा है. गोहाना उपमंडल अधिकारी सुभीता ढाका ने कहा कि वो शहीद अनिल कुमार के परिजनों की संवेदनाओं के साथ हैं. बता दें कि अनिल कुमार 21 साल की उम्र में जाट रजिमेंट में 21 जनवरी 2002 को सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे और उन्होंने इंसानियत की कीमत अपनी जान गवां कर चुकाई.गुरुवार को गांव लाठ में शहीद अनिल की 13वीं रस्म क्रिया पर गोहाना उपमंडल अधिकारी सुभीता ढाका और नायब तहसीलदार राजबीर सिंह दहिया पहुंचे. एसडीएम सुभीता ढ़ाका ने कहा कि शहीद अनिल कुमार के परिजनों की संवेदनाओं में वह उनके साथ हैं. जो भी प्रशासनिक कार्रवाही होगी वह पूरी की जाएगी और जो भी सहायता बनेगी की जायएगी.

Posted by रवि चौहान on 12:54 pm. Filed under , , , , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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