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कोचिंग संचालक और सीबीएसई स्कूल ऐसे खेलते हैं शातिराना खेल

सीबीएसई (केन्द्रीय शिक्षा माध्यमिक बोर्ड) पेपर लीक मामले में एक कोचिंग संचालक का नाम सामने आ रहा है. सीबीएसई ने भी राजेन्द्र नगर दिल्ली के रहने वाले एक कोचिंग संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. हालांकि ये कोई चौंकाने वाली बात नहीं है. क्योंकि कोचिंग संचालकों और सीबीएसई स्कूल संचालकों के बीच गठजोड़ की बातें पहले भी सामने आती रही हैं.
कोचिंग और स्कूलों के इस गठजोड़ का खुलासा करने के लिए हमने बात की लखनऊ और आगरा में स्कूल चलाने वाले संचालकों से. नाम न लिखने की शर्त पर उन्होंने बताया कि ‘आजतक अभिभावक अपने बच्चे को 9वीं और 11वीं क्लास से ही मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कराने के लिए कोचिंग भेजने लगते हैं. कोचिंग संचालक भी अभिभावकों की इस ललक का जमकर फायदा उठाते हैं.और यहीं से शुरु होता है शतिराना खेल. अगर छात्र इंजीनियरिंग की तैयारी करना चाहता है तो कोचिंग में उसे फिजिक्स, मैथ्स, सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी की जमकर तैयारी कराई जाती है. छात्र सुबह से शाम तक कोचिंग में पढ़ाई करता है. अब आप सोच रहे होंगे कि जब छात्र सुबह से शाम तक कोचिंग में पढ़ाई करता है तो स्कूल कब जाता है.अभिभावकों की स्कूल की परेशानी को दूर करते हैं कोचिंग संचालक. एक मोटी फीस के साथ कोचिंग संचालक अभिभावकों को ये भरोसा भी देते हैं कोचिंग में पढ़ने वाले उनके बच्चे का नाम स्कूल में भी लिखवा दिया जाएगा. बच्चे की क्लास में रोजाना हाजिरी लगती रहेगी. और तो और बच्चे को पास कराने का ठेका भी ले लिया जाता है.छात्र को स्कूल में रेगुलर दिखाने के लिए कोचिंग संचालक अपने किसी सांठ-गांठ वाले स्कूल में उसका नाम लिखवा देते हैं. इतना ही नहीं बहुत से ऐसे कोचिंग इंस्टीट्यूट भी हैं जो अपने ही 12वीं तक के स्कूल चला रहे हैं. ये लोग कोचिंग में आने वाले छात्र का नाम अपने ही स्कूल में लिखवा देते हैं. इस मामले में यूपी-उत्तराखण्ड की मेडिकल की तैयारी कराने वाली एक कोचिंग का नाम प्रमुख है.’

Posted by रवि चौहान on 12:19 pm. Filed under , , , , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Feel free to leave a response

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