घाटी भेजे गए माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने जवानों की सुरक्षा के लिए अपनी करीब आधा दर्जन बख्तरबंद माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल (एमपीवी) कश्मीर घाटी में पहुंचा दिए हैं।
इससे पहले इन एमपीवी का प्रयोग नक्सल विरोधी अभियानों के लिए किया जा रहा था। सीआरपीएफ की ओर से यह कदम शनिवार को हुए पांपोर हमले के बाद उठाया गया है। हमले में बल के आठ जवान शहीद हो गए थे।

सीआरपीएफ के डीजी के. दुर्गा प्रसाद ने कहा कि हमने काफिले की आवाजाही व सड़क खोलने के दौरान अपने जवानों की सुरक्षा के लिए अपनी कुछ एमपीवी को नक्सल प्रभावित क्षेत्र से हटाकर कश्मीर घाटी में शिफ्ट किया है। यह एमपीवी कश्मीर में तैनाती के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि यह एमपीवी आतंकियों द्वारा घात लगाकर हमला करने और सैनिकों पर गोलीबारी जैसी घटनाओं में बेहतर सुरक्षा प्रदान करेंगी।

सीआरपीएफ प्रमुख ने कहा कि बल ने आर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड को को 20 नए व आधुनिक एमपीवी का आर्डर देने को कहा है। इन एमपीवी को सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।

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अनिल कुंबले बने टीम इंडिया के नए कोच

लेग स्पिनर अनिल कुंबले टीम इंडिया के नए कोच होंगे। यह फैसला धर्मशाला में चल रही बीसीसीआई की बैठक में हुआ। 
लंबे समय से चल रहे कवायदों के बीच गुरुवार की शाम को टीम इंडिया के  नए कोच पर फैसला हो गया। अनिल कुंबले टीम इंडिया के नए कोच होंगे। बीसीसीआई के नए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने इस बात की जानकारी दी।

टीम इंडिया का कोच बनने की इस रेस में अनिल कुंबले के साथ रवि शास्‍त्री का नाम चल रहा था। ऐसी चर्चाएं थी कि टीम के डायरेक्टर रह चुके रवि शास्‍त्री को ही यह पद मिलेगा।

इस पद के लिए 57 आवेदन आए थे लेकिन सीधा टकराव अनिल कुंबले और रवि शास्‍त्री के ही बीच था।

6:30 pm | Posted in , , | Read More »

कर्ज से मुक्ति चाहते हैं तो आजमाएं यह पांच मंत्र

आपके ऊपर बैंक का लोन चल रहा है या क‌िसी से रुपये पैसे कर्ज ल‌िए हैं और उन्हें चुकाने में परेशानी आ रही है तो इसकी ऊपरी वजह धन की कमी या आकस्म‌िक व्यय हो सकता है। लेक‌िन इन सबके पीछे आपके ग्रह नक्षत्र और भाग्य का भी हाथ होता है। इस तरह की समस्या से मुक्त‌ि के ल‌िए कुछ मंत्र शास्‍त्रों और पुराणों में मौजूद हैं जो आपके आस-पास की नकारात्मकता को दूर करके इस योग्य बनने की क्षमता देता है ज‌िससे आप कर्ज से मुक्त‌ि प्राप्त कर सकें। कर्ज मुक्त‌ि के ल‌िए श्रीलक्ष्मी गायत्री मंत्र 'ओम ह्रीं महालक्ष्मी च व‌िद्महे व‌िष्‍णुपत्नीं च धीमह‌ि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ह्रीं ओम, का जप भी बहुत लाभप्रद माना गया है। इस मंत्र के जप का व‌िधान यह है क‌ि व्यक्त‌ि को कमलगट्टे की माला से न‌ियम‌ित 1008 बार जप करना चाह‌िए। 'ओम आं ह्रीं क्रौं श्रीं श्र‌ियै नमः ममालक्ष्मीं नाशय नाशय ममृणोत्तीर्णं कुरु कुरु संपदं वर्धय वर्धय स्वाहा।' ऐसी मान्यता है क‌ि इस मंत्र का 44 द‌िनों तक दस हजार बार जप, धन लाभ में सहायक होता है और व्यक्त‌ि को कर्ज से मुक्त‌ि म‌िलती है। ऋण मुक्त‌ि के ल‌िए के ल‌िए न‌ियम‌ित ऋण मुक्त‌ि गणेश स्तोत्र का पाठ लाभदायक मान गया है। अपनी सुव‌िधा के अनुसार इसका पाठ कभी भी कर सकते हैं।  हर मंगलवार ऋण मोचक मंगल स्तोत्र का पाठ ऋण से मुक्त‌ि के ल‌िए लाभप्रद माना गया है। शंकराचार्य द्वारा रच‌ित कनकधारा स्तोत्र धन बाधा दूर करने के ल‌िए बहुत ही कारगर माना गया है। ऋण मुक्त‌ि के ल‌िए न‌ियम‌ित इनका पाठ भी लाभदायक होता है।

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भाजपा नेता ने दी उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष को धमकी

भाजपा नेता और खानपुर के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने लंढौरा प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री उत्तराखंड हरीश रावत व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय पर निशाना साधा है।
कहा कि हरिद्वार में होने वाली भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रैली के दिन लंढौरा में शांति मार्च के बहाने अशांति मार्च निकालकर किशोर उपाध्याय राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना चाहते हैं।

उनके समर्थक किशोर उपाध्याय और उनके साथ आने वाले लोगों का टमाटरों, पत्थरों और गोलियों से स्वागत करेंगे। बाद में अपने बयान को बदलते हुए कहा कि लंढौरा में टकराव किसी भी हद तक जा सकता है।
  हरिद्वार में अमित शाह की रैली की तैयारियों को लेकर बैठक में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने कहा कि लंढौरा का विवाद मुख्यमंत्री हरीश रावत के इशारे पर माहौल खराब कराने के लिए कराया गया था।

अब शांति मार्च के नाम पर दोबारा माहौल खराब किया जा रहा है। लेकिन कांग्रेसियों की कोशिशों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। चेतावनी दी कि उनके पांच हजार समर्थक रैली में न आकर लंढौरा में मुस्तैद रहेंगे।

ऐसा भी हो सकता है कि टकराव होने पर हालात एक जून को हुए उन्माद से भी ज्यादा बदतर हो जाएं। उन्होंने कहा कि उनकी लंढौरा रियासत सदैव धर्मनिरपेक्षता की पक्षधर रही है। आज भी उनका सभी धर्मों के अनुयायियों में भारी जनाधार है। वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।

7:46 pm | Posted in , , | Read More »

मोटापे से हैं परेशान तो करे ये काम

धनुरासन- सबसे पहले चटाई पर पेट के बल लेट जाएं। ठुड्डी ज़मीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोड़ें और दोनों हाथों से पैरों के पंजे पकड़ें। 

फिर सांस भरें और बाजू सीधे रखते हुए सिर, कंधे, छाती को जमीन से ऊपर उठाएं। सांस सामान्य रखें और चार-पाँच सेकेंड के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पहले छाती, कंधे और ठुड्डी को जमीन की ओर लाएं। पंजों को छोड़ दें और कुछ देर विश्राम करें। 

तितली आसन- सबसे पहले किसी समतल जगह पर बैठ जाएं। दोंनों पैरों को सामने की ओर फैला लें। फिर दोनों पैरों को घुटनों की तरफ मोड़ लें। तलवों को आपस में मिला लें। हाथों से पैरों की उंगलियां पकड़ें। दोनों पैरों की एड़ियां खींचकर अपने शरीर के नजदीक ले आएं। धीरे धीरे सामान्य गति से सांस लें। अपने पैरों को तितली की तरह ऊपर नीचें करें।

चक्रासन- सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाइए। दोनों पैरों के बीच एक से डेढ़ फ़ीट का अंतर बनाये तथा पैरो के तलवों और एड़ियों को जमीन से लगाएं। अब दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़कर, हाथों को जमीन पर कान के पास इस प्रकार लगाएं कि उंगलियाँ कंधों की ओर तथा हथेलिया समतल जमीन पर टिक जाये। 

अब शरीर को हल्का ढीला छोड़े और गहरी साँस लें। पैरों और हाथों को सीधा करते हुए, कमर, पीठ तथा छाती को ऊपर की ओर उठाएं। सिर को कमर की ओर ले जाने का प्रयास करें तथा शरीर को ऊपर करते समय साँस रोककर रखे। फिर पीठ को सुविधानुसार पहिये का आकर देने की कोशिश करें। इसे 2 मिनट तक करें।


हलासन- जमीन पर पीठ के बल लेटें। दोनों पैर एक-दूसरे से मिला लें। दोनों हाथों की हथेलियां जमीन पर कमर के पास लगा लें। मुंह आसमान की तरफ कर लें। अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाएं। ऐसा करते समय पेट को सिकोड़ें और सांस को अंदर लें। दोनों पैरों को सिर के पीछे लगाने कि कोशिश करें। पीठ और कमर को पैरों के साथ पीछे की तरफ मोड़ने के लिए हाथों का सहारा लें। अब धीरे-धीरे अपनी क्षमता के अनुसार पैरों को मोंड़ें और थोड़ा रूकने का प्रयास करें। घुटनें बिलकुल न मोड़ें। अब वापस पहली अवस्था में आ जाएं।

भुजंगासन- ज़मीन पर उलटा लेट जाइए। पैर और नितम्बों को समान रूप से फैलाकर रखिए। हथेलियों को ज़मीन पर कंधों के सामने रखिए। उंगलियों को बाहर की ओर फैलाइए। सांस छोड़ते हुए पेट को बाहर की ओर दबाएं। सांस लेते हुए धीरे-धीरे मेरूदंड को अंदर की ओर मोड़ें। धीरे-धीरे सिर, नाक और ठुड्डी को ज़मीन से उठाइए। सिर को आसमान की ओर रखकर सामने देखिए।

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65 साल तक बच्चो को जन्म देती हैं पाकिस्तान के इस इलाके की महिलाए

दुनिया में एक ऐसी प्रजाति भी हैं जहां की औरतें 65 साल तक रजस्वला होती हैं और उस उम्र तक बच्चों को जन्म भी देती हैं। इस जनजाति की खूबियां जाननी हैं तो आपको पूरी खबर पढ़नी होगी।


ये लोग खूब खूबानी खाते हैं। ये लोग इतने सुंदर दिखाई देते हैं जैसे ये लोग इस धरती के नहीं बल्कि आसमान से आए कोई देवता या अप्सरा हों। 

उत्तरी पाकिस्तान के पहाड़ ही इनके घर हैं। इनकी संख्या 87 हजार के आसपास है। ये लोग इस मामले में खास हैं क्योंकि इनका जीवनकाल डेढ़ सौ साल से भी ऊपर है। इनमें से अधिकतर लोग बिना किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के अपना जीवन जीते हैं। कहते हैं कि इनमें से कुछ तो 160 साल तक भी जिंदा रहते हैं। 

वो बीमार पड़ते हों ऐसा बहुत कम देखा या सुना गया है। ट्यूमर जैसी बीमारी का तो उन्होंने कभी नाम ही नहीं सुना। 

हुंजा की औरतें तो 65 साल की उम्र तक बच्चों को जन्म देती हैं। इन लोगों को देखकर आप ये अंदाजा लगा सकते हैं कि खानपान और अच्छी जीवनशैली लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। 

हुंजा के लोग शून्य के भी नीचे के तापमान पर बर्फ के ठंडे पानी में नहाते हैं। ये लोग वही खाना खाते हैं जो ये खुद उगाते हैं। ये खूबानी, मेवे, सब्जियां और अनाज में जौ, बाजरा और कूटू ही खाते हैं। 

ये खाते कम हैं और टहलते ज्यादा हैं। 15 से 20 किलोमीटर तक टहलना इनकी जीवनशैली में शामिल होता है। साथ ही साथ हँसना भी इनकी जीवनशैली में शामिल होता है।

डॉक्टरों ने भी ये माना है कि इनकी जीवनशैली ही इनकी लंबी आयु का राज है।   

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शुगर के मरीज रोजे के दौरान इस रहर से रखे अपना ख्याल

नई दिल्ली। रमजान के दौरान जो मधुमेह के मरीज उपवास करते हैं, उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए उन्हें डॉक्टरी सलाह के बाद ही उपवास करना चाहिए, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है। रमजान के दौरान आमतौर पर सुबह से शाम तक उपवास रखा जाता है और यह एक महीने तक चलता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक भोजन में इतने लंबे समय तक का अंतर जो अमूमन 12 से 15 घंटों तक का होता है, उसके कारण शरीर के चयापचय में परिवर्तन आ जाता है, जिससे मधुमेह के मरीजों को काफी गंभीर स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती है।
मैक्स अस्पताल के निदेशक (मधुमेह व मोटापा केंद्र) विकास अहलुवालिया का कहना है कि अगर आपको मधुमेह है, इसके बावजूद आप रमजान के दौरान उपवास रखना चाहते हैं। तो उससे पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है ताकि रोजे के दौरान आप सभी एहतियाती कदम उठा सकें।
मधुमेह ऐसी स्थिति है जब इंसुलिन हार्मोन की कमी के कारण ब्लड में शुगर की अधिकता हो जाती है या शरीर के कोशिकाओं की ब्लड में शुगर के संचय के प्रतिरोध की क्षमता घट जाती है। रमजान के दौरान उपवास से डिहाइड्रेशन से लेकर ब्लड में शुगर के लेवल में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है।
फोर्टिस अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार (एंडोक्राइनोलॉजी विभाग) राकेश कुमार प्रसाद का कहना है कि लंबे समय तक उपवास और बेहद कम अंतराल पर 2 से 3 बार खाना खाने से शुगर के लेवल में बेहद तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है।
मधुमेह रोगी अगर उपवास करते हैं तो उन्हें हाइपोग्लाइसेमिया (ब्लड में शुगर के स्तर में तेज कमी) हो सकता है, जिससे वे बेहोश हो सकते हैं और नजर का धुंधलापन, सिरदर्द, थकान और तेज प्यास लगने जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। टाइप 1 मधुमेह के शिकार जिन्हें पहले भी हाइपोग्लाइसेमिया रहा है, उन्हें उपवास के दौरान खतरा और भी बढ़ जाता है।
डॉक्टरों ने बताया कि उपवास करने से मधुमेह रोगी की हालत इतनी खराब हो सकती है कि उसकी जान को भी खतरा हो सकता है। उसे केटोएसिडोसिस हो सकता है, जिसमें शरीर रक्त अम्लों (कीटोन) का अत्यधिक उत्पादन करने लगता है, जिसके कारण उल्टी, डिहाईड्रेशन, गहरी सांस में परेशानी, मतिभ्रम और यहां तक कोमा में जाने जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।
इसके अलावा उनमें थ्रोमबोसिस विकसित हो सकता है जिसके कारण खून जम सकता है। आदर्श रूप में किसी मधुमेह मरीज को रमजान से एक महीने पहले से ही किसी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और खानपान, इंसुलिन की मात्रा और अन्य दवाइयों को लेकर दी गई उसकी सलाह का पालन करना चाहिए।
मधुमेह के मरीजों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे उच्च कार्बोहाइड्रेट खाने पर काबू रखें, क्योंकि यह उनके शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। यह टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए बेहद जरुरी है।
रोजा के दौरान चीनी, रॉक चीनी, पॉम चीनी, शहद और कंडेंस्ड मिल्क को सीमित मात्रा में लेनी चाहिए।
हालांकि लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले कार्बोहाइड्रेट पदार्थों जैसे ब्राउन चावल, अनाज से बने ब्रेड, सब्जियां आदि ली जा सकती हैं, जबकि व्हाइट चावल, व्हाइट ब्रेड या आलुओं के सेवन से बचना चाहिए।
रमजान के दौरान जब दिन भर लंबा उपवास तोड़ते हैं तो शरीर को पानी की बेहद जरूरत होती है, इसलिए इस दौरान शुगर फ्री और कैफीन फ्री पेय पदार्थ ही लेना चाहिए।
डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट रितिका समादार ने बताया कि मधुमेह मरीजों के लिए यह जरूरी है कि वे प्राकृतिक शुगर ही प्रयोग करें जैसे जूस की बजाए फल का सेवन करें।
शहरी के दौरान कम मात्रा में खाना खाएं। मिठाइयां, तले हुए स्नैक्स, ज्यादा नमक या ज्यादा चीनी वाले पदार्थों के सेवन से बचें। इसके अलावा भोजन के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए और कम से कम दो घंटे का अंतराल जरूर रखें।
यह बेहद महत्वपूर्ण है कि संतुलित भोजन ग्रहण किया जाए, जिसका 20 से 30 फीसदी हिस्सा प्रोटीन हो। इसमें फल, सब्जियां और सलाद को शामिल जरूर करें और खाना बेक या ग्रिल करके पकाएं।
शहरी में ज्यादा प्रोटीन और कम कार्बोहाइड्रेट खाएं जिसमें ढेर सारे फल, अनाज से बने ब्रेड, होल ग्रेन लो शुगर सेरेल्स, बीन और दालें शामिल हों।
समादार का कहना है कि अहले सुबह लिए जाने वाले भोजन में प्रोटीन शामिल करें जैसे अंडे या दाल इत्यादि जो ऊर्जा को धीरे-धीरे दिन भर ऊर्जा का निस्तारन करती है। दिन भर ऊर्जा पाने के लिए एक संपुर्ण भोजन जरुरी है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और स्वास्थ्यकारी वसा का होनी चाहिए।
अहलुवालिया बताते हैं कि मधुमेह के मरीजों के लिए उपवास का फैसला इसमें दिए गए छूट के धार्मिक दिशानिर्देशों और सावधानीपूर्वक डॉक्टरी सलाह को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

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अनजाने में पति और बॉयफ्रेंड के ऊपर कहर बनकर टूटती हैं ये आदतें

कल तक सब कुछ ठीक या बल्कि अच्छा था लेकिन अचानक वहीं रिश्तें बदलने लगे। चीजें पहली जैसी नही रहीं और प्यार कहीं खा सा गया। ऐसा अक्सर देखा गया है कि अच्छे से प्यार भरे रिश्ते अचानक ऐसे मोड़ पर आ जाते हैं कि जहां पर समझ नहीं आता कि क्या किया जाए। इसके लिए कई बार दोषी ऐप खुद हैं। कुछ आदतें ऐसी हैं जिन्हें अनजाने में ही सही सामने वाले को तकलीफ देती है। या फिर दोनों ही अनजान है इस बात से और रिश्ते गलत दिशा में चलें जाते हैं। तो जानिए वो कौन सी आदतें हैं जनसे अगर बचा जाए तो रिश्ते की मधुरता को बनाए रखा जा सकता है।

किसी भी रिश्ते के लिए जरुरी है कि एक दूसरे के साथ समय बिताया जाएं लेकिन हर बार जरुरी नहीं है। एक इंसान का अपना खुद का स्पेस होता है। अगर उसे वो ना मिलें तो एक तरह की नीरसता सी आ जाती है जो परेशान करती है। और अगर इंसान खुद से खुश नही है वो दूसरे को भी खुश नही रख सकता।

कई बार किसी रिश्ते के खराब होने पर कुछ बुरे अनुभव कई तरह की असुरक्षा का भवना से धेर लेते हैं। ऐसे में ये असुरक्षा की भानवा इतनी हावी हो जाती है कि छोटी-छोटी चीजें आगे बढ़ने नहीं देती और रिश्ते बस छोटी-छोटी बातों की वजह से खराब हो जाते हैं।
  

नकारात्मक व्यवहार भी कई बार रिश्तों के खराब होने की वजह बनता है। दस अच्छे काम के भी अगर आप एक गलती को लेकर बैठ जाते हैं और लोगों को उस हिसाब से ही जज करते हैं तो ये किसी भी रिश्ते के लिए अच्छा संकेत नही है।

एक दूसरे की पसंद नापंसद जानना जितना जरुरी है उतना ही जरुरी है उसकी कद्र करना। आपके पार्टर के शौक हो सकते हैं आपसे अलग हो और खुद उसे ज्यादा पसंद ना करते हों लेकिन ये आपकी जिम्मेदारी है कि उनकी तारीफ करें और उनकी कोशिशों की सराहना करें।

हर कोई परफेक्ट नही होता और जब आप किसी रिश्ते में होते हैं तो एक दूसरे की जरुरतों को पूरा करने के लिए थोड़े बदलाव तो करने पड़ते हैं अपने अंदर। ऐसे में बदलाव की जगह अगर आप चीजों को लेकर अड़ जाते हैं तो इससे रिश्तों में तनाव होना जायज है।
  

3:54 pm | Posted in , | Read More »

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